भारत का ब्लैक पगोडा

ब्लैक पगोडा ? सुनने में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है मगर आपने कभी सोचा कि ये ब्लैक पगोडा आखिर है क्या ? काफी लोग तो शायद नाम सुनते ही इसे कोई जीव करार देंगे मगर हम आपको बतायंगे कि ये ब्लैक पगोडा आखिर है क्या ? भारत में कहाँ पर स्थित है?
कोणार्क के सूर्य मंदिर को भारत का ब्लैक पगोडा के रूप में ख्याति प्राप्त है | यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के रूप में मशहूर यह मंदिर उड़ीसा राज्य के पुरी जिले के पुरी नामकशहर में स्थित है |मंदिर की स्थापना १२३६ ई.पू में गंगवंश के राजा नरसिंह देव द्वारा की गयी थी | कलिंग शैली में निर्मित यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है| कोणार्क में कोण का अर्थ है कोण वहीं अर्क सूर्य के लिए प्रयुक्त हुआ है| यहाँ स्थानीय भाषा में सूर्य को बिरंचि नारायण कहते है|

स्थापत्य शैली


यह मंदिर सूर्य देव के रथ के रूप में निर्मित है | उत्कृष्ट नक्काशी इस मंदिर की शोभा में चार चाँद लगते है| इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि रथ के आकार में बने इस मंदिर को सात घोड़ो द्वारा खींचा जा रहा है | यह रथ बारह पहियों से युक्त है | मंदिर के आधार को सुन्दरता प्रदान करते ये बारह पहिये (चक्र ) साल के बारह महीनों के प्रतीक हैं | प्रत्येक चक्र आठ आरोन से मिल कर बना है जो दिन के आठ पहरों को दर्शाते हैं |

यह मंदिर भारत के उत्कृष्ठ स्मारक स्थलों में से एक है | यह मंदिर अपनी कामुक मुद्राओं की शिल्प कृतियों के लिए भी प्रसिद्ध है खजुराहो के बाद शायद ये अपनी तरह की अनोखी शिल्पकृति है| मंदिर में 3 मंडप हैं, जिनमे से 2 मंडप ढह चुके हैं|

सूर्य की तीन प्रतिमाएं यहाँ स्थापित हैं :
बाल्यावस्था- उदित सूर्य
युवावस्था- दोपहर का सूर्य
प्रौढावस्था- अस्त होता सूर्य
पौराणिक महात्म्य:
बिरंचि नारायण यानि सूर्य को समर्पित है यह मंदिर अर्क क्षेत्र में निर्मित है | एक मतानुसार कृष्ण के पुत्र साम्ब को श्राप से कोढ़ हो गया था| साम्ब ने चंद्रभाग संगम पर तप किया और सूर्यदेव ने प्रसन्न होकर उनके सरे रोगों का शमन कर दिया | सांब ने तब ठाना था कि वे सूर्य मंदिर बनवायेंगे | चंद्रभाग नदी से मिली मूर्ति की स्थापना उन्होंने मित्रवन में एक स्थान पर की तब से यह स्थान पवित्र माना जाने लगा |

संक्षिप्त टिपण्णी 


लाल बलुआ पत्थर एवं काले ग्रेनाइट से निर्मित मंदिर शिल्प एवं स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है| चूँकि मंदिर का काफी भाग धवस्त हो चुका है इसका कारण वास्तुदोष एवं मुस्लिम आक्रमण रहे हैं | ऐसे में मंदिर दर्शन अत्यंत रोमांचित करने वाला है | स्थापत्य कला का नायाब नमूना पेश करता है | यह दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है |

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